Saturday, September 5, 2015

शिक्षक दिवस

जिन राहों पर भारी क़दमों से रखता है, हर बचपन अपने क़दमों को, 
एक हाथ जो सम्हाल कर, सही मार्ग दिखा कर चलाता है सबको ,
गलतियों पर डांट कर, अच्छाइयों पर ताली बजा प्रोत्साहित करता  है जो,
माता - न पिता होता है, पर उनसे भी बढ़कर भलाई का मार्ग दिखाता है जो, 
ऊंचाइयों पर पंहुचा दें, एक ही मकसद होता करता है मार्ग दर्शन  जो ,
अध्यापक हर जीवन में हजरूरी, ये अब क्या समझना  हमको ,
एक ही  दिन उनके सम्मान का हो ऐसा तो जरूरी नहीं, 
हर बचपन को सीखना होगा सम्मान करना उनका, 
जिस समाज में अपमानित किया जा रहा है उनको ,
जो बनाते है भविष्य राष्ट्र के भावी नवजीवनों का,
अब तो उनके सम्मान के हक की लड़ाई के वास्ते बढ़ना होगा हर किसी को ,

सिर्फ अध्यापक दिवस मना कर ही जिम्मेदारियों से न भागना होगा,
शिक्षक और शिष्य के बीच फिर समन्वय बनाना होगा ॥
 

Monday, August 24, 2015

फिर याद आ रहा है

न जाने क्यों वो बचपन आज इस कदर याद आ रहा है,
मोहल्ले में बच्चों संग हुल्लड़ मचाना याद आ रहा है,
बादलों में बनते बिगड़ते चेहरे ढूंढना फिर याद आ रहा है,
बारिशों में भीग कर स्कूल से लौटना फिर याद आ रहा है,
 गिट्टी से खेलना  और मिटटी में सन जाना  याद आ रहा है,
झूले पर पेंगे मारना और अचानक गिर कर उठ जाना याद आ रहा है,
जेबों में मुरमुरा, रेवड़ी भर कर भाग जाना याद आ रहा है,
उसकी रचना कुछ इस तरह होती, न जाता भाग यूँ बचपन हमसे ,
मैं ही नहीं शायद हर किसी को दिन बचपन के हमेशा ही याद आते हैं,
एक दुसरे संग मुस्कुराते, खिलखिलाते,
मस्तियों भरा वो बचपन फिर याद आ रहा है,

 है कोई जो मुझको बस एक बार लौटा के दे जाये,
 बीते बचपन के दिन जो याद मुझको इस कदर आ रहा है ॥

Monday, July 27, 2015

व्यथा

विदा हो गया आज इस धरा से आज वो,

अपनी माँ की आँखों का तारा था जो,

नरम हांथों में पला था माँ ने न रहा आज वो,

सपना सा लगा सुना जब मैंने विश्वास ही न हुआ,

अपने हाथों से निवाले कभी मैंने भी खिलाये थे जिसको ,

खनखनाहट सी हंसी संग इधर- उधर डोलता था वो ,

न जाने कब और क्यों भटक राहों में गया था वो,

कुसंगतों में फंस जीवन की दिशा को मोड़ लिया था यूँ,

न संग कोई अपना रहा न गैरों ने साथ निभाना चाहा,

चूर-चूर कर दिए थे सपने देखे थे माँ ने खातिर जो,

आहिस्ता -आहिस्ता कदम अब लड़खड़ाने लगे थे यूँ ,

कुछ दिनों पहले उसके अस्थि पंजर मात्र तन  को देख सिहर उठा था मन मेरा,

यही जीवन की है व्यथा जाना हर किसी को पड़ता है आया है धरा पर जो,

उदास हो गया है मन मेरा भी किसी के आँगन का उजाला मिटा है जो ,       

वो एक सुबह आई ऐसी छोड़ बेसहारा अपनों को दूर गगन में गया था वो ॥


Saturday, July 11, 2015

helthy honey



 picture taken by me .
डाबर हनी शुद्ध और स्निग्ध होने के साथ ही स्वादिष्ट भी है। बच्चों को पराठे में ,ब्रेड में लगा कर दिया जाता है।
शहद चीनी की जगह इस्तेमाल किया जाता है,धरती पर चीनी का सबसे पुराना विकल्प है शहद , शहद एक बहुत ही हेल्थी ऑप्शन है चीनी का.
इसका उत्पादन सदियों से मधुमक्खियों द्वारा किया जाता है,मधुमक्खी पुष्प के पराग कण का रस लेकर छत्ते बनती है जिसमें ही शहद निकाला जाता है।  
इसका रंग हलके भूरे रंग से मिलता जुलता होता है ,स्निग्ध इतना की देखते ही सेवन का मन कर जाये ,
नियमित रूप से शहद का इस्तेमाल मोटापे को कम करता है ,शरीर में स्फूर्ति को बनाये रखने में सहायक होता है। प्रातः काल में नित्यक्रिया से निर्व्रत होकर शहद को पानी में मिलाकर पीने से न केवल मोटापा कम होता अपितु शरीर में ऊर्जा बढ़ाने में सहायक है. 
शहद में आयरन,कैल्सियम, विटामिन ए ,बी और च भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। 
इसके रस में अदरक का रस या सोंठ मिलाकर खाने से खांसी में आराम मिलता है। 
रक्त शुद्धि और ह्रदय से सम्बब्धित बीमारियों में भी शायद बहुत कारगर है। 
शहद का प्रयोग न केवल शरीर के लिए अपितु धार्मिक कार्यों में भी किया जाता है ,पूजन में शहद से अभिषेक किया जाता है, चरणामृत में मिलाया जाता है, साथ ही शहद का इस्तेमाल भगवान के अभिषेक में भी प्रयुक्त होता है। शहद से नियमित रूप से शिवाभिषेक करने से जीवन की समस्त परेशानियों का अंत  होता है ।

Monday, June 29, 2015

फर्ज है हमारा,

एक आंसू भी निकलने न दिया जिन्होंने हमारा,

उनकी आँखों को नम न करने का फर्ज है हमारा,

दौड़ आते थे जो एक ही आवाज़ पर हमारी ,

उनकी आवाज़ को अनसुनी न करें फर्ज है हमारा,

अपनी बातों से मन जिनका बेचैन किया था कभी हमने,

उनकी बातों को बैठ सुनले ये ही फर्ज है हमारा,

हर जिद को पूरा किया है जिन्होंने हमारी ,

छोटी- छोटी जरूरतों को हम करें पूरीं फर्ज है हमारा ,

सजा कमरे को हमारे खुद को कोने में रखा था जिन्होंने ,

उनकी खातिर आशियाना सजाएं ये फर्ज है हमारा ॥


Sunday, June 21, 2015

विश्व योग दिवस

योग का अर्थ सिर्फ कसरत का नहीं बल्कि मन्त्रों द्वारा अपने तन और मन के शुद्धिकरण की एक प्रक्रिया है ,
न होता गर कोई लाभ तो योग पर इतना जोर न होता ,हर तरफ योग करने के लिए कोई जोर न होता ,

आप गर योग नहीं करेंगे तो कोई आपको बांध कर नहीं कर सकता।
आज जिंदगी यूँ लगती है की जैसे बस भागी जा रही है, हर कोई तनहा भी है, और हर कोई परेशान भी ऐसे में योग ही एक ऐसा साधन है जो आपकी मानसिक,शारीरिक और पारिवारिक जीवन में शांति ला  सकता है ऐसा योग गुरुओं का मानना है।
योग दिवस के लिए  जहाँ तक मेरा मानना है की यह एक पर्व की तरह मनाया जाना चाहिए ,केवल आज ही नहीं परन्तु हमेशा ही एक पर्व की तरह मनाया जाना चाहिए।
जिस भारत देश को १० लोग जानते थे आज  विश्व योग दिवस के जरिये ही काम से काम विश्व भर में जाना जाने लगा है।
कोई कहता है की ये सब नौटंकी है तो ठीक है जो लोग कह रहे है क्या वो ये नौटंकी कर सके नहीं न, फिर जब अंगूर न मिलें तो खट्टे है।
हमें तो गर्व होना चाहिए युगों से चली आ रही परम्परा को आज नया आयाम मिला है।

Sunday, June 14, 2015

बारिश

तपिश से जलती, तप्ती धरा पर बारिश की दो ही बूंदों ने जैसे अमृत सी राहत दी है ,

यहाँ, वहां, इधर- उधर धीरे से मानों मानसून ने दस्तक दी है ,

सूखे से, मुरझाये से खड़े दरख्तों पर बूँद जैसे मोती से चमक रहे हैं ,

गर्द धूल की जिन पर जम गयी थी बूंदों में नहाकर निखर गयी है ,

सुर्ख लाल दहकते चेहरों पर एक बार रौनक फिर लौट आई है ,

मौसम की पहली ही  बारिश में हर ओर हरियाली सी छा गयी है ॥