Friday, January 24, 2014
Thursday, January 23, 2014
लम्हे
फुर्सत के लम्हे हों जब हमको भी याद कर लेना,
बंद पलकों से ही सही अपने होने का अहसास करा देना ।
तमन्ना है इतनी हर रोज तुम हमारे ख्वाबों में चले आना ,
ख्वाबों के सहारे ही हम बिता देंगे ये चार रैना ।
इंतज़ार में हर पल बिछा कर रखें हम अपने ये नैना,
एक छोटी सी इल्तज़ा है ऐ सनम तू जल्दी आ जाना ॥
Wednesday, January 22, 2014
इन्सान
आज इंसान ही इंसान को नीचा दिखाने की चाह में,
खुद ही गर्त में गिरा जाता है क्यों ,
सामने खाई है जानकार भी खुद ही गर्त में गिरा जाता है इस तरह क्यों ।
रश्क करता होगा जो खुद इंसान बनाकर ,अश्क बहाता होगा वो खुदा आज इंसान बनाकर ॥
Tuesday, January 21, 2014
बारिशें
लो आज फिर एक बार बादलों ने आसमान को घेरा है ,
धूप कहीं दूर, सूरज को फिर अँधेरे ने आ घेरा है ।
टपटप करती बूँदों खो गया फिर सवेरा है ॥
,रास्तों की भीड़ बसेरों में सिमट गयी है,दिन में ही छाया घना अँधेरा है ।
आँधियों के जोर से टहनियों ने दामन दरख्त का छोड़ा है,
लो आज एक बार फिर आसमान को बादलों ने आ घेरा है ॥
अहसास
१. वक़्त के थपेड़े इतने सहे हैं हमने ,ऐतबार के मायने ही भुला दिए थे हमने ।
अब जो दामन हमारा थामा है आपने,मझधार में न छोड़ोगे दिखा दो ये सपने ।
२. गम देते हैं वो फिर खुशियां देना चाहते हैं , आँखों के अश्कों को सहारा देना चाहते है ।
जाने है कैसा उनका प्यार क्या बताना चाहते हैं ,हर पल वो जमाने के सामने रुसवा करना चाहते हैं ॥
३. लव अल्फाजों को बयां करते इससे पहले आंसुओं ने कह दिया ,
दिल का हाल हम सुनाएं इससे पहले धड़कनों ने कह दिया ।
उनके अंदाज को समझे बिना ,चाहत अपनी बयां कर दिया ।
क्या गुनाह हमारा था, जो दिल हमारा यूँ तोड़ दिया ॥
Monday, January 20, 2014
drops
1.दोस्त हो आपसा तो सफ़र क्या मंजिल भी आसाँ हो जायेगी,
साथ छूटेगा नहीं जब तक ये जिंदगी न हो जाये फ़ना
2.मिल जाएँ गर हम राह में पहचान लेना ,एक बार हमें अपनी आँखों में बसा लेना॥
रास्ते तो बहुत जाते होंगे तेरे दर पे ,पर जो मिले मुझे वो तेरे दर का ठिकाना होगा ॥
pankhudi
1.पल जब मुस्कुरा के नाम हमारा तुमने लिया था ,उस ही पल ये दिल तुमको हमने दे दिया था,
सम्हाला बहुत अश्कों ने राज सबको बता दिता था,तेरी चाहत में हमने अपना सब कुछ लुटा दिया था ॥
2.कहीं ऐसा तो नहीं है मेरे दोस्त, कि मेरी शायरी आपके पेशाने पे लकीरें बना रही हों
मैं बेगानी पागल से अपनी ही धुन में आपके लिए बराबर पंक्तियें लिखे ही जा रही हूँ ??
3.नज़र से दूर थे दिल के करीब थे,वजह यही थी करवटें बदलते थे,
यादें तुम्हारी थीं,ख़्वाब भी तुम्हारे थे,
दिल तुम्हारे साथ था तुम नहीं बांहों में थे,
रात भर सोये नहीं तुम्हें खोजते राहों में थे
Subscribe to:
Posts (Atom)