मन को समझने वाली माँ,
भविष्य पहचानने वाला पिता
दोनों के अदम्य साहस पर
पुत्र या पुत्री का भविष्य है टिका
कतरों से खुद के सींच नवजीवन का संचार करना साहस माँ का है ,
कतरा -कतरा सहेज संतान का भविष्य संवारना साहस पिता का है ।
Hem lata srivastava
मन को समझने वाली माँ,
भविष्य पहचानने वाला पिता
दोनों के अदम्य साहस पर
पुत्र या पुत्री का भविष्य है टिका
कतरों से खुद के सींच नवजीवन का संचार करना साहस माँ का है ,
कतरा -कतरा सहेज संतान का भविष्य संवारना साहस पिता का है ।
Hem lata srivastava
एक पिता के प्रेम की अजब ये दास्ताँ है,
ऑखों में झलकता नहीं पर दिल में प्यार अपार है,
कभी ऊँगली पकड़ चलना सिखाया कभी काँधे पर बिठाया ,
संस्कारों और अनुशासन का हर पल पाठ पढाया,
जीवन के हर पथ पर साथ रह हौसला बढाया,
जिंदगी की डोर को थाम आगे बढना सिखाया,
ऑखों में ऑंसू आने से पहले एक महकता रूमाल आगे बढाया,
डरना नहीं, थमना नहीं हर पल ये ही पाठ पढाया,
पुत्र/पुत्री के कल को संवारने के वास्ते खुद को कभी जिसने न शिथिल किया,
कभी आसमान तो कभी धरा पिता है,
कभी अभिमान पिता है, पुत्र हो या पुत्री का स्वाभिमान पिता है,
एक उम्मीद इक आस पिता है
मेरे लिए तो बस एक संपूर्ण संसार पिता है।
Hem lata srivastava
बरसात की रात ⚡⚡⛈️⛈️
ताउम्र याद रहेगी मुझे वो ठिठुरती बरसात की रात, ⛈️⛈️
याद तुम भी बहुत आई थी माँ 👩👦उस बरसात की रात,
दस बरस की मै, अक्ल से भी न बडी न थी बहुत,
थी दिसम्बर की ठिठुरती, कंपकंपाती सी वो अंधेरी रात,
इक तरफ पानी झमाझम बरसना, आसमां में बिजली ⚡⚡का तडकना,
जा रहे थे बाबूजी, अपने काम से टूर पर उस रात, 🚆
न थी उस दिन गैस और लकडियाँ भी नम हो रही थी,
बनाना था भोजन रास्ते में ले जाने के वास्ते,
वो इक ओर बाबूजी का बडबडाना, और मेरे हाथों का काँप जाना,
जितनी बार भी चूल्हे को जलाती, उतना धुएं से ऑखों का जल जाना,
बन तो गये आलू 🥔🥔जैसे तैसे,अब था पूरी के लिए जुगत लगाना,
ठंड से तन काँप रहा था, मन का वो डर से कंपकंपाना, 😫
माँ तेरा न होना मुझे अंदर तक रूला रहा था उस रात,
कडाही को चढा चूल्हे पर, नन्हें हाथों से पूरियाँ का बेलना,
भीगी लकडियाँ का सुलगना दूजी ओर पूरियों का ऐंठ जाना,
बरसती बूंदों का तेल में गिरना और तेल का कडकडाना,
एक हाथ से कडाही में पूरी डालना तो दूजे से थाली का ढक देना,
न जाने कैसे बनाये था बाबूजी और सबके वास्ते मैंने निवाले,
ठंड में कांपते हाथों से बर्तन मांजना, बिस्तर का लगाना,
माँ बहुत रोईं थी सिसक-सिसक उस बरसात⛈️⛈️ की रात,
तेरे दामन को मुझसे छीनने के वास्ते😭 नाराज़ उस खुदा से थी उस रात,
उम्र के इस पड़ाव में आकर भी नहीं भूलती मुझे वो बरसात ⛈️ की रात।