Thursday, February 18, 2016
Friday, February 12, 2016
मौसम की मार
एक मुट्ठी चावल बीते चार दिनों से,
छत की मुंडेर पर रखे थे हमने,
कम एक दाना भी न हुआ, मन में बड़ा मलाल इस बात का था,
न जाने कहाँ गुम हो गए हैं चहचहाते वो पक्षियों का टोला,
मौसम की मार में उनकी चहचाहट भी सुन्न सी पड़ रही है,
न दरख्तों पर, न दालानों में, न किसी की छत पर ही ,
अब वो गौरैया कहीं भी नज़र कभी आती है,
घरों की कहलाने वाली वो गौरैया टहनियों पर भी नहीं आती नज़र हैं,
छतों को छोड़िए अब तो दालान भी न रह गए हैं,
आँगन भी बालकनी में बदलने लग गए हैं,
कागा की कांव-कांव भी अब कुछ कम ही सुनाई देने लगी है,
सूखे दरख्तों पर वो गिद्ध भी नज़र आते नहीं हैं,
मृत जीवों को नोचते- खसोटते न कौवे- चील- गिद्ध नहीं दिखते,
दूर देश से आने वाले पक्षियों का कारवां अब कम सा होने लगा है,
तालाबों में इठलाती, पानी में खिलखिलाती बतखें भी नहीं मिलती है,
सिमट रहा है संसार, जीव- जंतु मौसम और प्रदूषण की मार से॥
Tuesday, February 2, 2016
बेहतर,सुनहरी सुबह बेहतर दिन #Colgate360GoldMornings
सुबह की ठंडी हवाएं सुकून भरा अहसास दिलाती हैं, सूरज की किरणें धरा पर ऐसा अहसास दिलाती हैं मानों सोने की पर्त बिछी हो।
मैं हमेशा ही अपनी सुबह को और अधिक ताज़ा बनाने के लिए बागवानी करती हूँ, पौधों में पानी देना ऐसा और उनको देखना ऐसा लगता है सुबह और हसीं बन गयी हैं। बागवानी करना सुबह की तरोताज़ा हवा में अपने पौधों के बीच मंद- मंद टहलना ऐसा लगता है की शरीर में फिर से नई स्फूर्ति आ गयी हो.
सबकी दिनचर्या में सुबह उठकर सबसे पहले मुँह की सफाई करना मुख्य होता है, मेरा भी है , मैंने अपने दांतों की देखभाल के लिए हमेशा ही कोलगेट के उत्पादों का ही इस्तेमाल किया है , फिर चाहे वह ब्रश हो या पेस्ट.
हमने सपरिवार कोलगेट के सुरक्षात्मक और बेहतर उत्पादों को ही अपने जीवन में शामिल किया हुआ है।
और अब तो कोलगेट के #कोलगेट ३६० गोल्ड ब्रश को इस्तेमाल करके पूरे दिन ताज़गी और स्फूर्ति का अहसास कायम रहता है।
#Colgate360GoldMornings
स्वस्थ शरीर का आधार ही स्वस्थ दांत, और पेट है। कोलगेट टोटल पेस्ट को कोलगेट के ३६०चारकोल गोल्ड टूथब्रश पर लगाकर दांतों को साफ़ करने के बाद ऐसा महसूस होता है की दांतों में सोने सी चमक आ गयी हो.
#कोलगेट ३६० चारकोल गोल्ड से ब्रश करने के बाद खुलकर मुस्कुराने का दिल करता है। इसके बाद अपना नास्ता, खाना और दिनचर्या शुरू करने के लिए एक नयी स्फूर्ति प्राप्त होती है।
कोलगेट का तहे दिल से शुक्रिया। इसके बारे में और अधिक जानकारी के लिए हम कोलगेट के ऑफिसियल लिंक पर सर्च कर सकते हैं.
मैं हमेशा ही अपनी सुबह को और अधिक ताज़ा बनाने के लिए बागवानी करती हूँ, पौधों में पानी देना ऐसा और उनको देखना ऐसा लगता है सुबह और हसीं बन गयी हैं। बागवानी करना सुबह की तरोताज़ा हवा में अपने पौधों के बीच मंद- मंद टहलना ऐसा लगता है की शरीर में फिर से नई स्फूर्ति आ गयी हो.
सबकी दिनचर्या में सुबह उठकर सबसे पहले मुँह की सफाई करना मुख्य होता है, मेरा भी है , मैंने अपने दांतों की देखभाल के लिए हमेशा ही कोलगेट के उत्पादों का ही इस्तेमाल किया है , फिर चाहे वह ब्रश हो या पेस्ट.
हमने सपरिवार कोलगेट के सुरक्षात्मक और बेहतर उत्पादों को ही अपने जीवन में शामिल किया हुआ है।
और अब तो कोलगेट के #कोलगेट ३६० गोल्ड ब्रश को इस्तेमाल करके पूरे दिन ताज़गी और स्फूर्ति का अहसास कायम रहता है।
#Colgate360GoldMornings
स्वस्थ शरीर का आधार ही स्वस्थ दांत, और पेट है। कोलगेट टोटल पेस्ट को कोलगेट के ३६०चारकोल गोल्ड टूथब्रश पर लगाकर दांतों को साफ़ करने के बाद ऐसा महसूस होता है की दांतों में सोने सी चमक आ गयी हो.
#कोलगेट ३६० चारकोल गोल्ड से ब्रश करने के बाद खुलकर मुस्कुराने का दिल करता है। इसके बाद अपना नास्ता, खाना और दिनचर्या शुरू करने के लिए एक नयी स्फूर्ति प्राप्त होती है।
कोलगेट का तहे दिल से शुक्रिया। इसके बारे में और अधिक जानकारी के लिए हम कोलगेट के ऑफिसियल लिंक पर सर्च कर सकते हैं.
Monday, December 28, 2015
चलो स्वागत नव वर्ष का कर लें
लो फिर एक वर्ष जा रहा है खट्टी मीठी यादें देकर,
हज़ार ख्वाहिशें, हज़ार सपने अधूरे छोड़कर,
कुछ हो गए खफा हमसे, कुछ हमसे जुदा हो गए,
कुछ मिल गए भूले- बिसरे, कुछ हमें ही बिसरा चले,
कुछ नए रिश्ते बना गए जो अनजाने थे, कुछ जाने थे जो, हमसे जुदा हो चले,
कुछ दिलों में इस तरह बस गए, कुछ दिलों में खलिश छोड़ गए,
कुछ पल आँखों में इस कदर समां गए, कुछ नम आँखों को कर गए,
गलतियों को माफ़ कर हाथ दोस्ती का बढ़ा गए,
कुछ हाथ झटक परे हो चले,
चलो सब भूल जाते हैं, स्वागत नए वर्ष का करते हैं,
न गम आँखों में हो न दिलों में कोई शिकवे,
सभी को साथ लेकर नए वर्ष में कदम रखें,
चलो स्वागत नव वर्ष का कर लें,चलो स्वागत नववर्ष का कर लें ॥
Wednesday, December 23, 2015
ठण्ड
पहाड़ों पर बढ़ने लगी है बर्फ की सफ़ेद चादर, अब मैदान भी इस कदर ठिठुरने लगे हैं,
बंद होने लगे दरवाजे घरों के, न है जिनके पास छत बेहाल वो भी सिकुडंने से लगे हैं,
तनों पर परतें चढ़ने लग गयी हैं, न है जिनके पास फटेहाल वो गुदड़ी में सिमटने लगे हैं,
गली -मोहल्लों में सन्नाटे पसरने लगे गए हैं, सड़को पर अलाव भी अब जलने लगे है,
दरख़्त और पत्ते भी सिकुड़ रहे हैं, परिंदे भी छिपने के लिए जगह ढूंढने लगे हैं,
सूरज की तपिश भी अब मंद पड़ने लगी है, रात कोहरे की चादर में खोने सी लगी है,
सर्द हवाओं के थपेड़े न जाने अब कितनों को आगोश में लेगी,
ठण्ड एक बार फिर कहर ढाने को बेसब्र हो रही है ॥
Monday, November 16, 2015
विश्व शौचालय दिवस 19 november 2015
मनुष्य जीवन की सबसे जरूरी अव्सय्कता है शौचालय। आज भी दूरस्थ गांव में खुले में शौच करने लाखो ग्राम वासी जाते हैं, इसका कारण है शौचालय न होना साथ ही शौचालय की महत्ता का मालूम न होना। जिसके कारण सबसे अधिक परेशानी महिलाओं और लड़कियों को होती है. जिसमें सबसे अधिक यौन हिंसा का होना शामिल है।
१९ नवम्बर को विश्व शौचालय दिवस का मनाया जाना महज एक औपचारिकता ही नहीं है अपितु जागरूकता फैलाना भी है.
स्वछता के बारे में जागरूक करना है, यूँ तो अब शहरों में जगह- जगह सुलभ शौचालयों की व्यवस्था भी है परन्तु गावों में जहाँ भी शौचालय की व्यवस्था नहीं है वहां इसकी व्यवस्था करवाना साथ इसके बारे में सही और सटीक जानकारी भी फैलाना है, खुले में शौच से होने वाले नुक्सान के बारे में बताना है।
लाखों बच्चे कुपोषण का तो शिकार हो ही रहे हैं साथ ही अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त हो जाते हैं, न केवल बच्चे अपितु बुजुर्ग भी इससे होने वाली बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
जब समस्त सुविधाएं नहीं होती थीं तब खुले में बने शौचालयों के कारण हैजा, कालरा भी फ़ैल जाता था जो की महामारी का रूप ले लेता था।
तो आवश्य्कता है की आज हर घर में हर गांव में शौचालय की व्यवस्था बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। सड़को पर मल - मूत्र त्यागने वालों के लिए भी ठोस नियम बनाने की अव्सय्कता है, न केवल नियम बांये जाएं अपितु उन पर कठोरता से अमल लाने की जरूरत है।
अब हमको साथ मिलकर इस दिशा में जागरूकता फैलानी होगी और स्तिथि को बेहतर बंनाने की दिशा में हर मुमकिन कदम बढ़ाने होंगे। बस अब और नहीं देश, समाज, परिवार के स्वास्थ्य और स्वक्षता के लिए इंतज़ार नहीं कार्य करने होंगे।
बच्चों को सीखना होगा शौच के बाद हाथ अवश्य धोएं, बुजुर्गों और विकलांगों के लिए कमोड सिस्टम वाले शौचालयों की व्यवस्था की जाए। शौचालय से निकलने वाले पानी के निकास की उचित व्यवस्था हो, ताकि जो पानी पीने के लिए घरों तक पहुँचता है वो प्रदूषित न हो. साफ सफाई की बुनियादी जरूरतों के विकास में ठोस कदम उठाये जाने चाहिए।
http://thehapeecommode.com/
अधिक जानकारी जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें, जहाँ जगह- जगह होने वाली वर्कशॉप और इसके विषय में जानकारी देने के लिए कार्यक्रम की सूची है। http://www.worldtoiletday.info
http://www.worldtoiletday.info/
१९ नवम्बर को विश्व शौचालय दिवस का मनाया जाना महज एक औपचारिकता ही नहीं है अपितु जागरूकता फैलाना भी है.
स्वछता के बारे में जागरूक करना है, यूँ तो अब शहरों में जगह- जगह सुलभ शौचालयों की व्यवस्था भी है परन्तु गावों में जहाँ भी शौचालय की व्यवस्था नहीं है वहां इसकी व्यवस्था करवाना साथ इसके बारे में सही और सटीक जानकारी भी फैलाना है, खुले में शौच से होने वाले नुक्सान के बारे में बताना है।
लाखों बच्चे कुपोषण का तो शिकार हो ही रहे हैं साथ ही अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त हो जाते हैं, न केवल बच्चे अपितु बुजुर्ग भी इससे होने वाली बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
जब समस्त सुविधाएं नहीं होती थीं तब खुले में बने शौचालयों के कारण हैजा, कालरा भी फ़ैल जाता था जो की महामारी का रूप ले लेता था।
तो आवश्य्कता है की आज हर घर में हर गांव में शौचालय की व्यवस्था बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। सड़को पर मल - मूत्र त्यागने वालों के लिए भी ठोस नियम बनाने की अव्सय्कता है, न केवल नियम बांये जाएं अपितु उन पर कठोरता से अमल लाने की जरूरत है।
अब हमको साथ मिलकर इस दिशा में जागरूकता फैलानी होगी और स्तिथि को बेहतर बंनाने की दिशा में हर मुमकिन कदम बढ़ाने होंगे। बस अब और नहीं देश, समाज, परिवार के स्वास्थ्य और स्वक्षता के लिए इंतज़ार नहीं कार्य करने होंगे।
बच्चों को सीखना होगा शौच के बाद हाथ अवश्य धोएं, बुजुर्गों और विकलांगों के लिए कमोड सिस्टम वाले शौचालयों की व्यवस्था की जाए। शौचालय से निकलने वाले पानी के निकास की उचित व्यवस्था हो, ताकि जो पानी पीने के लिए घरों तक पहुँचता है वो प्रदूषित न हो. साफ सफाई की बुनियादी जरूरतों के विकास में ठोस कदम उठाये जाने चाहिए।
http://thehapeecommode.com/
अधिक जानकारी जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें, जहाँ जगह- जगह होने वाली वर्कशॉप और इसके विषय में जानकारी देने के लिए कार्यक्रम की सूची है। http://www.worldtoiletday.info
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Thursday, November 12, 2015
रिश्ता भरोसे का / #madeofgreat
कुछ सच, कुछ पल ऐसे भी हैं इस जीवन के,
याद करके ही रोमांच सा भर जाता है तन में,
न थी कोई मंजिल न कोई मतलब था इस जीवन का,
अवसाद से भरी मैं कुछ इस तरह से खो गयी थी किसी राह में,
अपनों के बीच खड़े रहने की न थी ताकत हममें ,
हर रोज एक नयी उलझनों में उलझी थी जिंदगी ,
कोई अपनी नयी पहचान बनाने को बेताब थी मैं,
एक रोज किसी अपने ही अज़ीज़ ने रौशनी की किरण दिखा कर,
जिंदगी रोशन इस तरह से कि बस क्या कहें ,
माना बहुत छोटा था वो अज़ीज़ मेरा पर जो,
मेरे जीवन का मजबूत रिश्ता है कुछ उसके साथ इस तरह से,
थमा गया हांथो में में मेरे वो किसी कोहनूर से कम न था।
वक़्त ऐसा अब बदल गया है दोस्तों ,
तन्हाइयों को भी करना पड़ रहा है इंतज़ार हर पल मेरे लिए
कहीं आंधियों के बीच मेरे मन का अवसाद खो सा गया है ,
अब तो फुर्सत ही नहीं उलझनों के लिए भी ,
देखते वो जो अपने ही थे, ऐसी हेय नज़रों से ,
नज़र उनकी भी अब बदल सी गयी है,
हकीकत से ऐसे भी सामना होगा सोचा न था ,
लोगो को बदलते इस तरह देखना होगा सोचा न था ,
सूरज के उजाले का मंजर देखते ही रहने को मन करता है
ऐसी खुशनुमा जिंदगी जीने का अब मजा आने लग गया है ॥
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हर किसी के अंदर एक प्रतिभा छिपी होती है जरूरत है बस उसे सहारा देने और उजागर करने की, लियोनेल मेसी के भीतर भी अथाह प्रतिभा है जो आज के युवाओं के लिए एक आइकन हैं. उन्होंने टाटा मोटर्स के लिए कहा है टाटा मोटर्स के हर प्रोडक्ट मजबूत, और भरोसेमंद हैं। टाटा मोटर्स के बारे में और अधिक जानकारी के लिए नीचे के लिंक पर देखा जा सकता है -http://madeofgreat.tatamotors.com/
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